पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- विगत एक दशक में भारत ने कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार एवं सामाजिक सुरक्षा उपायों के माध्यम से समावेशी रूपांतरण का अनुभव किया है, जिससे वंचना में उल्लेखनीय कमी आई है तथा कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों के जीवन-स्तर में सुधार हुआ है।
समावेशी रूपांतरण क्या है?
- समावेशी रूपांतरण से तात्पर्य ऐसी विकास प्रक्रिया से है, जो यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक वृद्धि, सामाजिक प्रगति एवं सार्वजनिक नीतियों के लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर गरीबों, हाशिए पर स्थित समुदायों तथा कमजोर एवं संवेदनशील समूहों तक पहुँचें।
- इसका उद्देश्य केवल आय में वृद्धि करना नहीं है, बल्कि बुनियादी सेवाओं, अवसरों एवं मानवीय क्षमताओं तक पहुँच को सुदृढ़ करना भी है, जिससे सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं में कमी लाई जा सके।
समावेशी रूपांतरण हेतु प्रमुख पहलें
- गरीबी उन्मूलन एवं सामाजिक सुरक्षा: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के अंतर्गत 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
- वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) प्रवासी श्रमिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाई है तथा रिसाव को कम किया है।
- वित्तीय समावेशन: प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के माध्यम से 58 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों को बिना जमानत ऋण प्रदान करती है।
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) तथा डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने वित्तीय समावेशन एवं डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया है।
- स्वास्थ्य एवं पोषण: आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) प्रत्येक परिवार को ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करती है।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन डिजिटल स्वास्थ्य अभिलेखों एवं निर्बाध स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को प्रोत्साहित करता है।
- मिशन इंद्रधनुष तथा मातृ स्वास्थ्य योजनाएँ बच्चों एवं माताओं के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने का कार्य कर रही हैं।
- जल, स्वच्छता एवं आवास: जल जीवन मिशन प्रत्येक परिवार को कार्यशील नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखता है।
- स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से लगभग सार्वभौमिक स्वच्छता कवरेज प्राप्त किया गया है।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) शहरी एवं ग्रामीण गरीबों के लिए किफायती आवास को प्रोत्साहित करती है।
- महिला सशक्तिकरण: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया गया है।
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना बालिकाओं की शिक्षा एवं सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), लखपति दीदी तथा ड्रोन दीदी पहलें महिला-नेतृत्व वाले उद्यमिता विकास को प्रोत्साहित करती हैं।
- आजीविका एवं रोजगार सृजन: विकसित भारत-रोजगार तथा आजीविका मिशन (पूर्व में मनरेगा) मजदूरी आधारित रोजगार एवं ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन को बढ़ावा देते हैं।
- प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi) रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना जमानत ऋण उपलब्ध कराती है।
- प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों एवं शिल्पकारों को सशक्त बनाती है।
- जनजातीय विकास: धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान समग्र जनजातीय विकास पर केंद्रित है।
- एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुँच को सुदृढ़ करते हैं।
समावेशी रूपांतरण में प्राप्त प्रगति
- निर्धनता एवं वंचना में कमी: बहुआयामी निर्धनता वर्ष 2013-14 के 29.17% से घटकर वर्ष 2022-23 में 11.28% रह गई, जो 17.89 प्रतिशत अंकों की कमी को दर्शाती है।
- इस अवधि के दौरान लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी निर्धनता से बाहर आए।

- जल, स्वच्छता एवं बुनियादी सुविधाएँ: जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण नल जल कवरेज वर्ष 2019 के 3.23 करोड़ परिवारों से बढ़कर मई 2026 तक 15.84 करोड़ परिवारों तक पहुँच गया, जो कुल ग्रामीण परिवारों के 81.87% को कवर करता है।
- ग्रामीण स्वच्छता कवरेज वर्ष 2014 के 39% से बढ़कर वर्ष 2019 में 100% हो गया।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार: मातृ मृत्यु अनुपात ( MMR) वर्ष 2014-16 के 130 से घटकर वर्ष 2021-23 में प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 88 रह गया।
- स्वच्छ ऊर्जा एवं विद्युत उपलब्धता: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 10.57 करोड़ निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में औसत विद्युत आपूर्ति वर्ष 2014 के 12.5 घंटे प्रतिदिन से बढ़कर वर्ष 2025 में 22.6 घंटे प्रतिदिन हो गई।
- आजीविका एवं महिला-नेतृत्व वाला विकास: DAY-NRLM के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं की संख्या 2.37 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ हो गई।
- स्वयं सहायता समूहों की संख्या बढ़कर 91.75 लाख तक पहुँच गई।

प्रमुख चुनौतियाँ
- क्षेत्रीय असमानताओं की निरंतरता: राज्यों, जिलों तथा जनजातीय क्षेत्रों के बीच विकास के परिणाम अभी भी असमान बने हुए हैं।
- सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में कमी: स्वास्थ्य, शिक्षा एवं स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच में सुधार हुआ है, किन्तु उनकी गुणवत्ता अभी भी असंगत बनी हुई है।
- आय संबंधी असुरक्षा: असंगठित रोजगार अभी भी श्रम बाजार पर प्रभुत्वशाली है तथा रोजगार सृजन की गति कार्यबल के विस्तार के अनुरूप नहीं रही है।
- पोषण संबंधी चुनौतियाँ: बाल कुपोषण, एनीमिया तथा अवरुद्ध वृद्धि अब भी गंभीर चिंताओं के विषय हैं।
- डिजिटल विभाजन: विशेषकर दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा डिजिटल साक्षरता की कमी बनी हुई है।
- सामाजिक बहिष्करण: प्रवासी श्रमिकों, शहरी बेघर व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों सहित अनेक संवेदनशील समूहों को अभी भी कल्याणकारी लाभों तक पहुँच में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- राजकोषीय स्थिरता: कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के लिए निरंतर वित्तीय संसाधनों तथा लाभार्थियों की प्रभावी पहचान की आवश्यकता है।
आगे की राह
- अंतिम बिंदु तक सेवा वितरण को सुदृढ़ीकरण: लाभार्थियों की पहचान तथा शिकायत निवारण तंत्र को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
- सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार: केवल अवसंरचना निर्माण पर बल देने के बजाय सेवा गुणवत्ता एवं परिणाम-आधारित निगरानी को प्राथमिकता दी जाए।
- डिजिटल समावेशन को प्रोत्सहन : वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी तथा डिजिटल साक्षरता का विस्तार किया जाए।
- मानव पूंजी में निवेश: स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाए।
- सहकारी संघवाद का सुदृढ़ीकरण: नीतियों एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु केंद्र, राज्यों एवं स्थानीय निकायों के मध्य बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
Source: PIB
Previous article
भारत का नया द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) मॉडल
Next article
SIPRI ईयरबुक 2026